Gold Price : 15 जनवरी 2026 को भारत में सोने के दाम नए रिकॉर्ड स्तरों पर पहुंच गए हैं। राजधानी दिल्ली समेत देश के ज्यादातर बड़े शहरों में 24 कैरेट गोल्ड 1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के ऊपर ट्रेड हो रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का हाजिर भाव 4,635–4,640 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड ज़ोन में दिख रहा है।
दिल्ली, मुंबई और मेट्रो शहरों में Gold Price
दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,44,160 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट की कीमत 1,32,160 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। मुंबई में 22 कैरेट गोल्ड 1,32,010 रुपये और 24 कैरेट गोल्ड 1,44,010 रुपये प्रति 10 ग्राम पर मिल रहा है, जो दिल्ली के रेट के लगभग बराबर है। चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों में भी 22 कैरेट का भाव 1,32,010–1,32,060 रुपये और 24 कैरेट का भाव 1,44,010–1,44,060 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में है।
दूसरे बड़े शहरों में आज का Gold Price
जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ जैसे उत्तर भारत के शहरों में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,32,160 रुपये और 24 कैरेट की कीमत 1,44,160 रुपये प्रति 10 ग्राम चल रही है। अहमदाबाद और भोपाल में 22 कैरेट गोल्ड 1,32,060 रुपये और 24 कैरेट गोल्ड 1,44,060 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कोट हो रहा है, जो पश्चिम और मध्य भारत में एक तरह का रेफरेंस रेट बन चुका है। पुणे और बेंगलुरु में 24 कैरेट गोल्ड 1,44,010 रुपये और 22 कैरेट गोल्ड 1,32,010 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है, जिससे पता चलता है कि देशभर में रेट लगभग सिंक्रोनाइज़ हो चुके हैं।
इंटरनेशनल मार्केट में सोने की चाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड स्पॉट प्राइस 4,635–4,640 डॉलर प्रति औंस के बीच ट्रेड कर रहा है, जो अब तक के रिकॉर्ड ऊपरी स्तरों में शामिल है। पिछले एक साल में सोने की कीमत में 70 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई है, जहां जनवरी 2025 में सोना करीब 2,700 डॉलर प्रति औंस था, वहीं जनवरी 2026 में यह 4,600 डॉलर के ऊपर निकल चुका है। ताज़ा सत्र में गोल्ड स्पॉट में एक दिन में करीब 1–1.8 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई, जो सेफ-हेवन डिमांड के मजबूत बने रहने की ओर इशारा करती है।
भू-राजनीतिक तनाव और सेफ-हेवन डिमांड
ईरान में बढ़ती अशांति, रूस–यूक्रेन युद्ध के जारी रहने और मध्य-पूर्व में तनाव जैसे कारकों ने ग्लोबल स्तर पर अनिश्चितता बढ़ा दी है। इससे निवेशक दोबारा सेफ-हेवन एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं, जिसमें गोल्ड सबसे ऊपर दिख रहा है और इसका सीधा असर कीमतों में तेजी के रूप में देखने को मिल रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान बढ़ती हिंसा और हजारों लोगों की मौत से जुड़ी खबरों ने भी सोने की मांग को और तेज कर दिया है।
फेडरल रिजर्व, ब्याज दरें और गोल्ड
अमेरिका में कोर CPI दिसंबर माह में केवल 0.2 प्रतिशत माह-दर-माह और 2.6 प्रतिशत साल-दर-साल बढ़ा है, जो बाजार के अनुमान से कम है। इससे निवेशकों को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व 2026 में ब्याज दरों में और कटौती करने के लिए मजबूर हो सकता है, जिससे गोल्ड जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट्स की आकर्षण और बढ़ गई है। फेड की स्वतंत्रता को लेकर उठ रहे सवाल और चेयरमैन पर चल रही आपराधिक जांच जैसी खबरों ने भी फाइनेंशियल मार्केट में वोलैटिलिटी और गोल्ड की डिमांड दोनों को बढ़ावा दिया है।
भारतीय रुपये, इंपोर्ट ड्यूटी और घरेलू कीमतें
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में हल्की कमजोरी ने भी घरेलू गोल्ड प्राइस को ऊपर धकेला है, क्योंकि सोने का अंतरराष्ट्रीय व्यापार डॉलर में होता है और महंगा डॉलर भारत जैसे आयातक देशों के लिए गोल्ड को और महंगा बना देता है। भारत सरकार की तरफ से लगाई गई इंपोर्ट ड्यूटी और जीएसटी भी अंतिम खुदरा कीमत में शामिल होती हैं, जिसके कारण इंटरनेशनल स्पॉट प्राइस के मुकाबले घरेलू रेट और ज्यादा दिखते हैं। शादी–विवाह के सीजन और त्योहारी मांग के चलते ज्वेलरी सेक्टर से फिजिकल डिमांड भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जो मौजूदा रैली को सपोर्ट दे रही है।
निवेश और ज्वेलरी डिमांड का मिश्रित असर
भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड कंज्यूमर देशों में शामिल है, जहां गोल्ड को न सिर्फ ज्वेलरी के रूप में बल्कि लॉन्ग टर्म निवेश और सुरक्षा के तौर पर भी खरीदा जाता है। गोल्ड ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड और सोवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्पों ने निवेशकों को भौतिक सोने के बिना भी इस रैली में भाग लेने का मौका दिया है, जिससे ओवरऑल इन्वेस्टमेंट डिमांड में इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ, ऊंचे दामों के बावजूद पारंपरिक ज्वेलरी खरीद में बहुत बड़ी गिरावट नहीं दिख रही, बल्कि कई शहरों में प्राइस राइज के बावजूद स्थिर डिमांड देखने को मिल रही है।
डिस्क्लेमर: यहां पर दी गई जानकारी कोई भी निवेश सलाह नहीं है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें और अपनी जिम्मेदारी पर ही निवेश करें।